''शुभ सुप्रभातम''
देखो मौसम का मिजाज,
थोड़ा बदल गया कल और आज,
हल्की-हल्की फुहार(ठंडी) सी लगती है,
जब सुबह-सुबह खिड़की खुलती है,
इसमें उठना अजीव लगता है,
सोना सबसे ज्यादा सजीव लगता है,
मौसम प्यारा है... इसमें सोना न्यारा है,
अब सूरज ने किया साफ(दूर) अंधकार,
हमें भी करनी पड़ी नींद दरकिनार,
उठ गए हैं अब हम,
शुभ सुप्रभातम
देखो मौसम का मिजाज,
थोड़ा बदल गया कल और आज,
हल्की-हल्की फुहार(ठंडी) सी लगती है,
जब सुबह-सुबह खिड़की खुलती है,
इसमें उठना अजीव लगता है,
सोना सबसे ज्यादा सजीव लगता है,
मौसम प्यारा है... इसमें सोना न्यारा है,
अब सूरज ने किया साफ(दूर) अंधकार,
हमें भी करनी पड़ी नींद दरकिनार,
उठ गए हैं अब हम,
शुभ सुप्रभातम

Very nice
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