Thursday, 5 March 2020

कविता- "मैं तुमसे इश्क करती हूँ"💞💞

💖💞"मैं तुमसे इश्क करती हूँ"💞💖

तुम्हारी तस्वीर को मैं, आईना समझकर देखती हूँ,
मैं तुमसे इश्क करती हूँ, मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

कमरे में सिर्फ किताबें, डायरियां और तुम्हारे तोहफे रखे हैं,
मैं उन्हें देखती हूँ कभी हंसती हूँ तो कभी रोती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

एक गुलाब तुम्हारा दिया हुआ आज भी किताबों के बीच संभालकर रखा है, मैं उसे देखती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

पछली सर्दियों में जो तुमने दिलाया था वुलन का स्वेटर
मैं उसे सबसे ज्यादा पहनती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

जो ली थी मैंने तुम्हारी गज़लों की डायरी तुमसे
मैं उसे पढ़ती हूँ फिर सीने से लगाकर सोती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

जो दिया था तुमने सिंदूर इश्क में
मैं उसे अपनी मांग में भरकर अकेले सोती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

मुझे अब किसी और की चाह नहीं
मैं तुम्हें अपनी रूह में समेटकर खुश रहती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

-अनूप'बसर'(वो देखती राहें- साझा संग्रह में प्रकाशित)
बुलंदशहर(उत्तरप्रदेश)

अधूरा सफ़र

 "अधूरा सफ़र" कल अचानक सफऱ करने का मन किया। तो सोचा छुट्टियां  भी हैं और बहुत दिनों से दोस्तों से भी नहीं मिले हैं। तो फिर हम बैग म...