Monday, 11 May 2020

मेरी प्यारी माँ

"मेरी प्यारी माँ"

माँ तुम्हारा ये दुलार
है मुझपर अपार
तुम जब हो जाती हो जरा सी भी चुप
समझ लेना मेरी भी खुशी जाती है छुप
अगर है मेरी कोई गलती
तो तुम गुस्सा ना करो
तुमसे ही तो मैं खिलती हूँ
तुम्हारे जैसी ही तो मैं दिखती हूँ
इतना कठोर ना बनाओ अब खुद को
और ना बढ़ाओ अपनी इस जिद्द को
मैं भी तुम्हारी ही बेटी हूँ
बदल ही दूंगी तुम्हारी इस जिद्द को
जब अच्छा तुमको नहीं लगता
तो अच्छा मुझे भी नहीं लगता
मैं तुम्हारे जितनी अच्छी तो नहीं बन सकती
तुम माँ हो मेरी मैं तुम्हारी माँ तो नहीं बन सकती
मान जाओगी कुछ दिनों में ही
तुम भी हो अगर अडिग
तो मैं भी हूँ अडिग
मैं भी तुमको मनाकर ही मानूँगी
तभी मैं खुद को माफ कर पाऊँगी।

-अनूप बसर(गोलू)
बुलंदशहर(उत्तरप्रदेश)

Thursday, 5 March 2020

कविता- "मैं तुमसे इश्क करती हूँ"💞💞

💖💞"मैं तुमसे इश्क करती हूँ"💞💖

तुम्हारी तस्वीर को मैं, आईना समझकर देखती हूँ,
मैं तुमसे इश्क करती हूँ, मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

कमरे में सिर्फ किताबें, डायरियां और तुम्हारे तोहफे रखे हैं,
मैं उन्हें देखती हूँ कभी हंसती हूँ तो कभी रोती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

एक गुलाब तुम्हारा दिया हुआ आज भी किताबों के बीच संभालकर रखा है, मैं उसे देखती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

पछली सर्दियों में जो तुमने दिलाया था वुलन का स्वेटर
मैं उसे सबसे ज्यादा पहनती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

जो ली थी मैंने तुम्हारी गज़लों की डायरी तुमसे
मैं उसे पढ़ती हूँ फिर सीने से लगाकर सोती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

जो दिया था तुमने सिंदूर इश्क में
मैं उसे अपनी मांग में भरकर अकेले सोती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

मुझे अब किसी और की चाह नहीं
मैं तुम्हें अपनी रूह में समेटकर खुश रहती हूँ
मैं तुमसे इश्क करती हूँ मैं तुमसे इश्क करती हूँ।

-अनूप'बसर'(वो देखती राहें- साझा संग्रह में प्रकाशित)
बुलंदशहर(उत्तरप्रदेश)

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