Saturday, 3 February 2018

Poem

   ''शुभ सुप्रभातम''
देखो मौसम का मिजाज,
थोड़ा बदल गया कल और आज,
हल्की-हल्की फुहार(ठंडी) सी लगती है,
जब सुबह-सुबह खिड़की खुलती है,
इसमें उठना अजीव लगता है,
सोना सबसे ज्यादा सजीव लगता है,
मौसम प्यारा है... इसमें सोना न्यारा है,
अब सूरज ने किया साफ(दूर) अंधकार,
हमें भी करनी पड़ी नींद दरकिनार,
उठ गए हैं अब हम,
शुभ सुप्रभातम

Good morning poem

"बस उठने ही वाला है प्यारा गोलू"
💖💖💖💖💞💞💞💞💞

अरे वाह! गोलू कितने प्यार से सो रहा है,
कभी इधर कभी उधर करवट ले रहा है,
खुली ये रेशमी जुल्फें मुख को अपने आँचल से रोशनदान सी ढक रही,
इसमें पगली का प्यारा चेहरा ऐसा... प्रतिबिम्ब में लालिमा दिख रही,
अब गोलू सपनों में जा रहा है,
कुछ खुली से कुछ बन्द से देखता रहा है,
कम्बल ओढ़े तन को छिपा रहा है,
हवा ना जाये...हर ओर से दबा रखा है,
पर ख्वाब तो ख्वाब हैं,
हर कहीं से आना लाजमी हैं,
अब देखो गोलू कुछ देर में उठेगा,
अपना प्यारे मुख से उठते ही ये संदेश पढ़ेगा।

Motivational shayri

अंदाज जीने का अलग रखो,
देखो लो सबको पर खुद का काम सही रखो,
ये दुनिया अंधी भीड़ है मुखोटे पहने है,
इतना काबिल बनो के खुद को भीड़ से अलग रखो।
अनूप।

अधूरा सफ़र

 "अधूरा सफ़र" कल अचानक सफऱ करने का मन किया। तो सोचा छुट्टियां  भी हैं और बहुत दिनों से दोस्तों से भी नहीं मिले हैं। तो फिर हम बैग म...