Saturday, 3 February 2018

Good morning poem

"बस उठने ही वाला है प्यारा गोलू"
💖💖💖💖💞💞💞💞💞

अरे वाह! गोलू कितने प्यार से सो रहा है,
कभी इधर कभी उधर करवट ले रहा है,
खुली ये रेशमी जुल्फें मुख को अपने आँचल से रोशनदान सी ढक रही,
इसमें पगली का प्यारा चेहरा ऐसा... प्रतिबिम्ब में लालिमा दिख रही,
अब गोलू सपनों में जा रहा है,
कुछ खुली से कुछ बन्द से देखता रहा है,
कम्बल ओढ़े तन को छिपा रहा है,
हवा ना जाये...हर ओर से दबा रखा है,
पर ख्वाब तो ख्वाब हैं,
हर कहीं से आना लाजमी हैं,
अब देखो गोलू कुछ देर में उठेगा,
अपना प्यारे मुख से उठते ही ये संदेश पढ़ेगा।

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